
मंगलसूत्र (थाली) हटाना और दशकों तक अलग रहना मानसिक क्रूरता: मद्रास हाई कोर्ट ने तलाक को बरकरार रखा
भारतीय वैवाहिक परंपराओं और वैवाहिक संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसले में मद्रास हाई कोर्ट ने कहा है कि पत्नी द्वारा विवाह के प्रतीक मंगलसूत्र (थाली) को हटाना, पति पर बार-बार गंभीर आरोप लगाना और कई दशकों तक अलग रहना मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) माना जा सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने पति को दिए गए तलाक के आदेश को बरकरार रखा।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला एक ऐसे दंपति से जुड़ा था जिनकी शादी को लगभग 49 वर्ष हो चुके थे। पति और पत्नी पिछले लगभग 30 वर्षों से अलग-अलग रह रहे थे। पति ने आरोप लगाया कि पत्नी ने उनके खिलाफ कई झूठे और मानहानिकारक आरोप लगाए, उनकी नौकरी और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की तथा विवाह का प्रतीक माने जाने वाले मंगलसूत्र (थाली) को भी हटा दिया।
निचली अदालत ने पति को तलाक दे दिया था, जिसे बाद में अपीलीय अदालत ने भी बरकरार रखा। इसके बाद पत्नी ने मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हाई कोर्ट ने भी तलाक के फैसले को सही माना।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
मदुरै बेंच के न्यायमूर्ति पी. वडामलाई ने कहा कि हिंदू विवाह परंपरा में थाली (मंगलसूत्र) वैवाहिक जीवन की निरंतरता का पवित्र प्रतीक माना जाता है। पत्नी द्वारा इसे हटाना पति के प्रति मानसिक क्रूरता का संकेत हो सकता है। कोर्ट ने यह भी माना कि जब पति-पत्नी कई दशकों तक अलग रहते हैं और उनके बीच संबंध पूरी तरह टूट चुके हों, तो ऐसी स्थिति भी मानसिक क्रूरता के दायरे में आ सकती है।
लंबे समय तक अलगाव भी बना महत्वपूर्ण आधार
कोर्ट ने कहा कि यदि विवाह केवल कागजों पर ही बचा रह जाए और पति-पत्नी के बीच वर्षों से कोई वैवाहिक संबंध या साथ रहने का प्रयास न हो, तो ऐसी स्थिति दोनों पक्षों के लिए पीड़ादायक हो सकती है। लंबे समय तक अलगाव और लगातार विवाद वैवाहिक संबंधों के पूर्ण टूटने का संकेत देते हैं।
कानूनी दृष्टिकोण से इस फैसले का महत्व
यह फैसला बताता है कि भारतीय न्यायालय केवल शारीरिक हिंसा को ही नहीं, बल्कि मानसिक उत्पीड़न और वैवाहिक व्यवहार को भी गंभीरता से देखते हैं। यदि किसी पक्ष के व्यवहार से दूसरे पक्ष को लगातार मानसिक पीड़ा, अपमान या सामाजिक नुकसान होता है, तो उसे मानसिक क्रूरता माना जा सकता है।
निष्कर्ष
मद्रास हाई कोर्ट का यह फैसला वैवाहिक विवादों में मानसिक क्रूरता की परिभाषा को और स्पष्ट करता है। कोर्ट ने माना कि मंगलसूत्र हटाना, झूठे आरोप लगाना और दशकों तक अलग रहना जैसे तथ्य मिलकर विवाह के पूर्ण रूप से टूट जाने और मानसिक क्रूरता को साबित कर सकते हैं। इसी आधार पर अदालत ने तलाक के आदेश को बरकरार रखा।
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